जब हम छोट रहनी त देखले रहनी कि घरमें सभ केहु छोट बबुआ- बचिया के खेलावतघरी, गुद-गुदावत घरीए गीत के गावत रहे ।
ओका बोका तीन तड़ोका
लउआ लाठी चंदन काठी
बागमें बगड़ोल वाडोले
सावन में करईला फरे
ओ करईला के नाम का
इजई बिजई
पनवा फुलवा
ढोड़ियां पुचुक
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