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रक्सौल रेलखंड पर तेजी से बढ़ रहा विकास

डबल लाइन से लेकर भारत-नेपाल रेल परियोजना तक कई कामों में आई रफ्तार

रक्सौल, 2 अगस्त: भारत-नेपाल सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण रक्सौल रेलखंड का स्वरूप आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाला है। रेलवे इस क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है, जिनका उद्देश्य ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना, समयपालन में सुधार करना, माल ढुलाई को आसान बनाना और भारत-नेपाल के बीच रेल संपर्क को और मजबूत करना है।

सबसे अहम परियोजनाओं में नरकटियागंज–रक्सौल–सीतामढ़ी–दरभंगा डबल लाइन परियोजना शामिल है। करीब 256 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के तहत पूरे रेलमार्ग को सिंगल लाइन से डबल लाइन में बदला जा रहा है। हाल ही में कुंदवा चैनपुर–रक्सौल (41.04 किमी) सेक्शन के निर्माण का ₹358.97 करोड़ का ठेका आरवीएनएल को दिया गया है। डबल लाइन बनने के बाद ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे यात्रा अधिक तेज और समयबद्ध होगी।

इसी क्रम में सुगौली–रक्सौल रेलखंड के 26 किलोमीटर हिस्से में ट्रैक नवीनीकरण का कार्य भी पूरा किया जा रहा है। पुराने रेल ट्रैक और स्लीपरों की जगह आधुनिक ट्रैक बिछाए गए हैं। आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों के बाद इस सेक्शन पर ट्रेनों की गति 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाई जा सकेगी।

रेलवे की एक अन्य महत्वाकांक्षी योजना हाजीपुर–वैशाली–सुगौली नई रेल लाइन है। 148.3 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के पूरा होने के बाद रक्सौल के लिए एक नया और अपेक्षाकृत सीधा रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे मौजूदा मार्ग पर ट्रेनों का दबाव कम होने और संचालन में सुधार की उम्मीद है।

भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित रक्सौल–काठमांडू अंतरराष्ट्रीय रेल परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। 136 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और फाइनल लोकेशन सर्वे तैयार हो चुके हैं। परियोजना पूरी होने के बाद दोनों देशों के बीच यात्री और माल परिवहन को नई गति मिलने की संभावना है।

इसके अलावा रेलवे कम उपयोग वाले कुछ स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की भी समीक्षा कर रहा है। जहां आवश्यकता होगी, वहां स्टॉपेज में बदलाव कर लंबी दूरी की ट्रेनों का यात्रा समय कम करने की योजना है।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनों की समयपालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही रक्सौल से दिल्ली, कोलकाता और देश के अन्य प्रमुख शहरों तक यात्रा का समय कम हो सकता है। मालगाड़ियों की आवाजाही बढ़ने से भारत-नेपाल के बीच व्यापार को भी बड़ा लाभ मिलेगा और भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के लिए मजबूत आधारभूत संरचना तैयार होगी।

यदि सभी परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो रक्सौल पूर्वी भारत और भारत-नेपाल रेल संपर्क का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

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